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Birth/ Death

Birth Ends Death Starts

ज़िन्दगानी हो चली थी मेरी एक गु

नाह,
मोहब्बत को नहीं मिल रही तेरी पनाह।

तलाश कर रहा हूँ अब भी जिसे कह सकुँ अपना रहबर ,
वक़्त बीत रहा धीरे आज रेत पे फना हो रहा ये सिंकदर।

Lalit Mohan Chandra Shekhar

इकबाल/Fortune

इकबाल/Fortune

यह नासाज ज़िस्म मेरा वक़्त की रेत में हो जायेगा फना ,
पर याद रखना बात चेहरे पे दिलशाद हौसले रहेंगे बुलंद।

निभा कर अपने सारे वचन चले हम मौत के उस आगोश,
जिसे कुबुल किया परवार्दिगार ने कहा यही थी तेरी रजा |

Lalit Mohan Chandra Shekhar

Alone/ तनहाई

तनहाई /Aloneness

बिखरे हुएे अपने उस खोये हुएे वजूद को कर रहा सिमटा ,
वक़्त कैसे बीत रहा है तुझे इस तरह यूँ ही जैसे देखकर।

आज तेरी बात हो रही जो तुझसे ही शुरू तुझपे ही खत्म,
अब कहुँ इससे आगे दिल में समा लिया है तुझे बसाकर ।

Lalit Mohan Chandra Shekhar

Blood comes out it kills honesty

Blood comes out It kills honesty

जब कभी किसी भी शक्स का लहु गिरता शमशीर के कट जाने से ,
तब याद करना हमारे ईमान जैसे अक्स दफन होता दो गज ज़मीन में।

कैद कर दिया माचिस की नूर को जो रोशन करती थी चिरागों से इस जहाँ को ,
हर तरफ मच रहा यही तो कोहराम है जल रही चितायें हर गली के उन चौराहों में।

Lalit Mohan Chandra Shekhar

Blood comes out it kills honesty

Blood comes out It kills honesty

जब कभी किसी भी शक्स का लहु गिरता शमशीर के कट जाने से ,
तब याद करना हमारे ईमान जैसे अक्स दफन होता दो गज ज़मीन में।

कैद कर दिया माचिस की नूर को जो रोशन करती थी चिरागों से इस जहाँ को ,
हर तरफ मच रहा यही तो कोहराम है जल रही चितायें हर गली के उन चौराहों में।

Lalit Mohan Chandra Shekhar